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Friday, 21 February 2020

जब महादेव को करना पड़ा कुंती पुत्र अर्जुन से युद्घ!

महादेव को देवो के देव भी कहा जाता है।यु कहे तो हर कण कण में महादेव बस्ते है।वो सबका कल्याण करते है चाहे वो सुर हो या राक्षस,महादेव की कृपा सदैब सब पर बनी रहती है।महादेव को पशुपति भी कहा जाता है।


इस पोस्ट के माध्यम से मैं आपको बतावउँगा की आखिर क्यों महादेव को करना पड़ा था कुंती पुत्र अर्जुन से युद्ध।
अर्जुन 5 पांडवो में से एक था।अर्जुन के बड़े भाई का नाम युधुस्थिर था।अर्जुन बहुत ही पराक्रमी योध्या था।महाभारत के युद्ध में उसने कौरवो सेना को धूल चटा दी थी।

तो आये जानते है की आखिर क्यों करना पड़ा महादेव को अर्जुन से युद्ध।

एक बार की बात है अर्जुन जंगल में भगवान शिव की घोर तपस्या में लीन थे।वो भगवान शिव को प्रसन्न करने के उद्देश्य से ये तपस्या कर रहे थे।तभी वहा एक मूक नामक दैत्य सूकर का रूप धारण करके वहाँ आ गया।अर्जुन उस सूकर का वध करने के लिए आये,तभी भगवन शिव अर्जुन की परीक्षा हेतु भगवान शिव भी धनुष -बाण धारण कर वहाँ आ पहुचे।



दोनों में साथ में बाण चलाया और शिवजी का बाण सूकर को वेधता हुआ मुख के रास्ते निकलकर भूमि में विलीन हो गया।अर्जुन का बाण सूकर को भेदकर बगल में ही गिर पड़ा।जब शिवजी का अनुचर बाण उठाने आया तो अर्जुन का उस से विवाद हो गया कि किसके बाण से सूकर का वध हुआ है।इस बात पर अर्जुन किरात के साथ युद्ध करने को उधत हो गए।गणों सहित महादेव के साथ अर्जुन का घोर युद्ध हुआ ।शिवजी अर्जुन की युद्धकौशल से बहुत प्रसन हुए और उसे अपने असल स्वरुप के दर्शन दिए।अर्जुन को अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने प्रभु शिव की स्तुति की।अंततः वर स्वरुप शिवजी ने अर्जुन को अपना पाशुपत अस्त्र प्रदान किया।

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