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Tuesday, 18 February 2020

आखिर क्यों मनाया जाता है शिवरात्रि का त्यौहार हर वर्ष।

शिवरात्रि का त्यौहार Hindu सनातन धर्म का बहुत ही पवित्र त्यौहार माना जाता है।ये हर साल February-March के महीने में मनाया जाता है।ऐसी कहाबत प्रचलित है कि इसी दिन भगवान शिव ने माता पार्वती संग अपना विवाह रचाया था।इस पोस्ट के माध्यम से मैं आपको बतावउँगा शिवरात्रि मानाने के पीछे का राज।क्यों हर साल हम लोग शिवरात्रि का त्यौहार मनाते है।
भगवान शिव को आदि गुरु भी कहा जाता है जिनके करोड़ों शिष्य हुए।शिवरात्रि का मतलब होता है शिव की रात्रि(Night ऑफ़ the Shiva)|ये त्यौहार कृष्ण पक्ष (त्रयोदशी या चतुदर्शी) February- March महीने में मनाया जाता है।



हिन्दू पुराणों के अनुसार ये दिन भगवान शिव का बहुत ही पवित्र दिन माना गया है।एक बार की बात है माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा की :- हे प्रभु!आपको सबसे प्रिय कौन सा दिन है ।तब भगवान महादेव ने कहा कि कृष्ण पक्ष का 14 वाँ दिन उनके लिए सबसे पवित्र दिन है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव तांडव नृत्य करते है और इस दिन जो कोई भी सच्चे हृदय से महादेव का ध्यान करते है,उनकी सारी मनोकामनाएं महादेव ज़रूर पूरा करते है।



शिवरात्रि को लेकर एक और कथन हमारे हिन्दू ग्रंथो में मिलता है।एक बार की बात है जब सुर और असुर अमृत की खोज में समुद्र मंथन कर रहे थे तभी उस से भयानक हलालला विष निकला।विष इतना विकराल था कि इस से सारी सृष्टि का विनाश हो जाता।तब भगवान शिव ने हलालला विष को अपनी कंठो में धारण किया,तब से उनका  नीलकंठ भी कहा जाने लगा।ऐसी मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव ने वो हलालला विष का पान किया था।तब से ही शिवरात्रि का त्यौहार प्रचलन में है।


एक और कथा पुराणों में प्रचलित है।एक बार की बात है ब्रह्मा और विष्णु में एक बार किसी चीज़ को लेकर बहस शुरू हो गयी।उन दोनों में शर्त लगी वो उन दोनों में सबसे श्रेष्ठ और शक्तिशाली कौन है।तभी वहा एक अग्नि का स्तंभ प्रजौलीत हुआ।उसका न तो की आदि था न अंत।उस स्तंभ से आवाज़ आयी की जो सबसे पहले इस स्तंभ का आखिरी छोर पता कर लेगा वही आप दोनों में से सबसे श्रेष्ठ होगा।ब्रह्मा और विष्णु दोनों उस स्तम्भ का आखिरी छोर पता लगाने निकल पड़े।भगवान विष्णु ने वराह का अवतार लिया।उस स्तंभ का छोर पता लगाना इतना भी आसान नही था।ब्रह्मा ने केतकी का फूल लिया और उस स्तम्भ के पास जाकर बोला की ये फूल उन्हें स्तम्भ के आखरी छोर पर मिला है।पर महादेव को ब्रह्मा की झूठ का पता चल गया।उन्होंने ब्रह्मा को श्राप दिया की वो कभी भी अपने इस झूठ की वजह से पूजे नही जायेंगे।उन्होंने केतकी को भी श्राप दिया की केतकी के फूल से कभी भी कोई पूजा नही होगी।ये कृष्ण पक्ष का 14 वाँ दिन ही था।जो की शिवरात्रि का ही दिन माना गया है।

शिवरात्रि का त्यौहार मानाने का एक अपना रिवाज़ होता है।इस दिन लोग भांग का भी सेवन करते है।भांग भगवान शिव को अति प्रिय है।इसे शिवलिंग पर अर्पित कर देने से हर पापो का नाश होता है।इस दिन शिवलिंग पर लोग दूध और बेलपत्र चढ़ाते है।


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