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Tuesday, 11 February 2020

आखिर क्यों प्रजापति दक्ष था महादेव का घोर विरोधी|

महादेव को देवो के देव भी कहा जाता है।जब भी कोई संकट आता है तो सभी देवता चाहे वो असुर हो या सुर महादेव का स्मरण जरूर करते है।गले में सापों की माला लपेटे और मस्तक पर चंद्रमा लिए महादेव सभी का कष्ट निवारण करते है।वो कभी भी अपने भक्तों में भेदभाव नही करते है।

आज की पोस्ट में मैं आपको बतावउँगा की आखिर क्यों प्रजापति दक्ष था महादेव का घोर विरोधी।प्रजापति दक्ष ब्रह्न का पुत्र था।जब इस सृष्टि की उत्पत्ति हुई थी जो की ब्रह्मा ने की थी।एक बार की बात है ब्रह्मा और विष्णु में शर्त लगी की उन दोनों में सबसे श्रेष्ठ कौन है।तभी अचानक एक भयानक लिंग उत्पन्न हुआ जिसका न कोई छोर था।वो तो इतना विकट था कि उसका छोर पता लगाना नामुमकिन ही था।


उस लिंग से आवाज़ आयी की अगर आप दोनों में से जो सबसे पहले मेरा आखिरी छोड़ पता लगा लेगा वही सर्वश्रेष्ठ होगा।छोर का पता लगाने के लिए विष्णु ने सूगर का अवतार लिया और ब्रह्मा भी उस छोर को पता लगाने निकल पड़े।पर किसी को उस लिंग का आखिरी छोर नही मिल पाया।उस लिंग का न तो कोई आदि था न कोई अंत।वो तो अनंत था।

पर ब्रह्मा ने झूठ बोला की उन्होंने उस लिंग का आखिरी छोर पा लिया है।तब उस लिंग में महादेव उत्पन्न हुए।उन्हें ब्रह्मा की बात सुनकर बहुत क्रोध आया और उन्होंने ब्रह्मा का 5वा सर काट दिया वही महादेव विष्णु की ईमानदारी पर बहुत प्रसन्न हुए।फिर क्या था तब से ही प्रजापति दक्ष महादेव का घोर विरोधी हो गया।
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प्रजापति दक्ष ने महादेव से बदला लेने के लिए अनेक सरयंत्र रचा पर महादेव के आगे उसका हर वार विफल हो गया।वही दक्ष की सबसे प्रिय पुत्री महादेव से प्यार करने लगी और वो महादेव से शादी करना चाहती थी।पर दक्ष तो महादेव का घोर विरोधी था उसने महादेव को नीचा दिखाने के लिए एक महान यज्ञ का आयोजन किया।इस यज्ञ में उसने सभी देवी,देवता ,यक्ष,गन्धर्व को आमंत्रित किया पर महादेव को नही।

ये सुन कर माता सती को बहुत क्रोध आया पर वो महादेव से उस यज्ञ में जाने के लिए ज़िद करने लगी।महादेव ने माता सती को समझाया कि भले की दक्ष आपके पिता हो पर बिना निमंत्रण के उस यज्ञ में जाना ठीक नही होगा।इस से आपका केवल अहित ही होगा।फिर भी माता सती नही मानी।अंत में महादेव ने अपने प्रिय वाहन नंदी को माता सती के साथ जाने को कहा जब माता सती यज्ञ में पहुची तो दक्ष ने महादेव को बहुत बुरा भला कहा।इस से माता सती बहुत दुखी हुई और उन्होंने उसी यज्ञ के अग्निकुंड में अपने प्राणों की आहुति दे दी।
इस सब से चारो ओर हाहाकार मच गया।जब महादेव को उसका पता चला तो वो क्रोध के मारे तांडव करने लगे।तांडव वो नृत्य है जो प्रलय के समय महादेव करते है।महादेव ने अपनी जटा को ज़मीन पे पटक दिया जिससे भयानक वीरभद्र प्रकट हुआ।वीरभद्र ने दक्ष का सर धर से अलग कर दिया पर महादेव तो दयालु है ।उन्होंने दक्ष को बकरी का सर लगा दिया।दक्ष ने महादेव से क्षमा मांगी और उनसे कहा कि आज के बाद कोई भी यज्ञ महादेव के आवाहन के बिना पूरा नही होगा।

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