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Monday, 17 February 2020

कौन था Andhak।क्यों उसने भगवान Shiv से Parvati को ही वरदान में मांग लिया था।

भगवान Shiv को देवादीपति महादेव भी कहा जाता है।भगवान शिव कभी भी अपने भक्तों में भेदभाव नही करते है वो हमेशा चाहे वो सुर हो या असुर कभी भी वरदान देने में कभी संकोच नही करते है।Last Post में मैंने Shiv के Demon Son:- जलंधर के बारे में बताया था।अगर आपने उस पोस्ट को नही पढ़ा तो आप इसे यहाँ पढ़ सकते है:-ऐसा था Shiv का Demon Son :- जलंधर!
क्या आपको पता है कि Andhak ने भगवान Shiv से माता पार्वती को ही वरदान में मांग लिया था।



एक बार की बात है भगवान Shiv कैलाश पर्वत पर घोर तपस्या में लीन थे तभी माता पार्वती ने शिव के दोनों आँखों को अपनी हाथों से ढक दिया जिस से समस्त ब्रह्मांड अंधकार में डूब गई थी।भगवान Shiv ने अपनी तीसरी आँख को खोल दिया जिससे अग्नि प्रकाशित हुई।ये अग्नि उनके पसीने(Sweat) से मिल गयी,जिस से अंधक का जनम हुआ।अंधक जन्म से ही अँधा था।
दूसरी ओर असुर सम्राट Hiranyaksh पुत्र की प्राप्ति के लिए भगवान शिव की घोर तपस्या करने लगा।भगवान Shiv ने प्रकट होकर Hiranyaksh को Andhak भेंट दिया और उन्होंने उसे चेतावनी दी की अगर उसके पुत्र ने कोई भी पाप किया तो वो उसे खुद दंड देंगे और उसके प्राण हर लेंगे।Hiranyaksh ने भगवान शिव की बात मान ली।

यु तो Andhak जन्म से ही अँधा था परंतु वो भगवान Shiv की तीसरी आँख से जन्मा था इसलिए वो काफी पराक्रमी और बलवान था।चूंकि अंधक का जन्म उस समय हुआ था जब समस्त ब्रह्मांड अंधकार में लिप्त था,इसका प्रभाव ये हुआ की अंधक में असुरो वाले गुण आ गए और दिनों दिन वो काफी निर्दयी बनता गया।

एक बार की बात है Andhak Brahma की घोर तपस्या कर रहा था।Brahma ने अंधक को वरदान दिया की उसके रक्त की जितनी भी बूंदे ज़मीन पर गिरेगी उस से एक और नए अंधकासुर असुर का जनम होगा।एक और असुर था जिसे ये बरदान मिला हुआ था,जिसका जिक्र दुर्गा पाठ ने मिलता है,उस असुर का नाम रक्तबीज था।बरदान पाकर Andhak बहुत प्रसन्न हुआ और वो तीनो लोको पर आधिपत्य ज़माने के लिए तयारी करने लगा।



एक दिन अंधक ने कैलाश पर माता पार्वती को देखा और वो उनकी सुंदरता का कायल हो गया।वो माता पार्वती से शादी करना चाहता था।ये सब सुनकर माता पार्वती को बहुत क्रोध हुआ और उन्होंने ये बात भगवन शिव को बताई।ये बात सुनकर महादेव को बहुत क्रोध हुआ और उन्होंने Andhak से कहा कि पारवती उसकी माता के समान है तो भला वो अपनी ही माँ से कैसे विवाह कर सकता है।ये सब के बाबजूद अंधक नही माना और Andhak और भगवान Shiv ने प्रलयकारी युद्ध हुआ।जब भी रक्त की कोई बून्द ज़मीन पर गिरती,उस से एक और अंधकासुर का जन्म हो जाता ।तब भगवान shiv ने Kaali का आह्वान किया।माता काली ने अंधक का सारा रक्त ज़मीन पर पड़ने से पहले ही उसे चट कर जाती,जैसे की उन्होंने रक्तबीज नामक असुर का वध किया था,ठीक उसी प्रकार,उन्होंने Andhak का वध कर दिया।आख़िरकार भगवान Shiv ने Andhak को अपनी तीसरी आँख से भस्म कर दिया।
पर महादेव तो भोलेनाथ है,अंधक ने भगवान शिव से माफ़ी मांगी और भगवान शिव ने उन्हें अपनी गण में शामिल कर लिया।अंधक अब Bringi बन चूका था।Bringi को Shiv का ही गण माना जाता है।

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